Devendra Soni December 11, 2019

सत्य या सपना ,

नित्य बदलते संसार में कैसे कहे क्या सत्य है क्या सपना ,
सुख दुख ,अवसाद या उल्लास क्या सत्य है क्या सपना ,

ये जिन्हें आज हम अपना है कहते ,कल न जाने किसके क्या होंगे ,
सफ़र में रोज़ बदलते रिश्ते कैसे माने क्या सत्य है क्या सपना,

गीता क़ुरान ग्रन्थों ने सिखाये हमें नाना धर्म कर्म की बातें ,
समय के साथ बदलती गई राहे क्या सत्य है क्या सपना ,

ईश्वर ने रचा हम सब मानते है पर किसे पता वो क्या है ,
किस राह पर चल कर पायें उसे वो सत्य है या सपना ….

कभी हवाओं में महसूस हुआ वो कभी फूलों में मुस्कुराया ,
आँसू में हमेशा रहा फिर भी मन समझ न पाया वो सत्य है या सपना …

चार दिन की हमारी जिन्दगानी वो युगों युगों का मालिक ,
कैसे मान ले हम कि उसका होना न होना सत्य है या सपना …

© कुन्ना चौधरी

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