Devendra Soni December 11, 2019

जाना ना था

एक दूजे का साथ
जीने का बहाना भर था
जिधर तुम जा रहे थे
उधर मुझे जाना ना था

एक दूसरे से बतियाते
उस मोड़ तक आए थे हम
जहांँ से हमें एक दूजे के
साथ जाना ना था

जिस इशारे से कहा था तुमने
तुम्हारी चुप्पी बहुत प्यारी है मुझे ,
जो प्यारी लगी थी तुम्हें ,
हमें उस चुप्पी के साथ जीना ना था

शुरू हुआ था एक सफर
इस मोड़ से उस मोड़ तक,
कुछ दूर तक का सफर था,
उस सफर के अंत तक जाना ना था।

पुष्पा सहाय
रांची , झारखंड

2 thoughts on “रांची झारखंड से पुष्पा सहाय की रचना -जाना ना था

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