Devendra Soni December 10, 2019

मेरे सनम(ग़ज़ल)

प्यार का एक पल मुझे उधार दे दो सनम।
मुझ पर अन्तिम यही उपकार कर दो सनम।

व्यस्तताएं तुम्हारी कुछ यूँ हैं बढ़ गईं।
मेरे लिए वक्त कहाँ, यह बता दो सनम!

तलाशती रही जिन खुशियों को दर-बदर।
पाया कि उनका आधार तुम्हीं हो सनम।

ख़्वाहिशें बहुत सी दिल में हैं मेरे,
पर उनकी मंज़िलें बस तुम्हीं हो सनम।

ग़र किसी की शिद्दत से की ‘उपासना’,
वह ख़ुदा की बुत नहीं, तुम्हीं हो सनम।

– डॉ उपासना पाण्डेय
प्रयागराज, उत्तर प्रदेश

1 thought on “प्रयागराज से डॉ. उपासना पांडेय की ग़ज़ल- मेरे सनम

  1. मेरी रचना को स्थान देने के लिए सादर आभार 🌹🌹

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