पंडरिया, कवर्धा से महेन्द्र देवांगन की रचना – नदियाँ

नदियाँ ( सार छंद)

कलकल करती नदियाँ बहती , झरझर करते झरने ।
मिल जाती हैं सागर तट में , लिये लक्ष्य को अपने ।।

सबकी प्यास बुझाती नदियाँ , मीठे पानी देती ।
सेवा करती प्रेम भाव से , कभी नहीं कुछ लेती ।।

खेतों में वह पानी देती , फसलें खूब उगाते ।
उगती है भरपूर फसल तब , हर्षित सब हो जाते ।।

स्वच्छ रखो सब नदियाँ जल को , जीवन हमको देती ।
विश्व टिका है इसके दम पर , करते हैं सब खेती ।।

गंगा यमुना सरस्वती की , निर्मल है यह धारा ।
भारत माँ की चरणें धोती , यह पहचान हमारा ।।

विश्व गगन में अपना झंडा , हरदम हैं लहराते ।
माटी की सौंधी खुशबू को , सारे जग फैलाते ।।

शत शत वंदन इस माटी को , इस पर ही बलि जाऊँ ।
पावन इसके रज कण को मैं , माथे तिलक लगाऊँ ।।

महेन्द्र देवांगन माटी (शिक्षक)
पंडरिया (कवर्धा)
पंडरिया
8602407353
mahendradewanganmati@gmail.com

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