धनबाद, झारखंड से पूनम सिन्हा की अभिव्यक्ति-छली है आज फिर बेटी

छली है आज फिर बेटी

छली है आज फिर बेटी,
जली है आज फिर बेटी।
अजी क्या बेहयाई है,
तनिक ना शर्म आई है।

कि इक बेचार नारी को,
बड़ी ही सूकुमारी को।
दबोचा दानवों ने तब,
पड़ी लाचार थी वो जब।

मदद का दे सभी झांसा,
उसे बस जाल में फांसा।
बड़ी दुष्कर्म कर डाला,
जला कर राख कर डाला।

रहा ना अव कहीं मानव,
सभी क्यों हो रहे दानव।
रहा ना आस मर्दों पर,
नहीं विश्वास मर्दों पर।

मदद को जब कभी आए,
कहीं मन कांप ना जाए।
हिला कर रख दिया दानव,
हुआ बदनाम सब मानव।

दरिंदों को नहीं छोड़ो,
कि उसके हाथ अब तोड़ो।
रहे उसकी नहीं टांगें,
मिले ना मौत भी मांगे।

रहे वो उम्र भर सरता,
गुनाहें याद ही करता।
बुरा सोचे नहीं ऐसा,
कि जीवन हो नरक जैसा।

पूनम सिन्हा
धनबाद, झारखण्ड।

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