कोलकाता से सन्दीप गुप्ता दीप की रचना -यज्ञ हो या युद्ध

यज्ञ हो या युद्ध

यज्ञ हो या युद्ध,
ख़ुद को आहुति बन तैयार होना होगा,
समाज को बदलने के लिए,
अपने मैं को भूलना होगा….

संघर्ष तो है जीवन,
ख़ुद से भी करना होगा,
सुख की तलाश नहीं,
बलिदान सर्वस्य करना होगा…

रोशनी की चाह जो रखते,
सूरज की तरह तपना होगा,
अन्धेरी राहों पर,
दीप की तरह जलना होगा….

क्या बदलेगा, जो स्वयं ना बदले,
फैसला करना होगा,
फासला है, कठिन राहें हैं,
प्रयत्न करना होगा…

मानुष बनने के लिए,
मिट्टी की तरह रौंदना होगा,
राख होने के पहले,
अहं को भस्म करना होगा…

सन्दीप गुप्ता ‘दीप’
कोलकाता

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