प्रतापगढ़ से दीपक तिवारी की रचना – माँ

माँ

माँ वंदन है, माँ है पूजा
माँ हिन्दू है, माँ है मुस्लिम
और हर धर्मों का मेल है माँ
माँ गीता है, माँ है कुरान
और बाइबिल का रूप है माँ
माँ सीता है, माँ ही द्रोपदी
और अहिल्या का रूप है माँ
माँ धरती है, माँ ही आसमां
और सृष्टि का विस्तार है माँ
माँ उम्मीद है, माँ ही हौसला
और हर मुश्किल का हल है माँ
माँ ही रास्ता, माँ ही मंजिल
और हर जीवन का रूप है माँ

दीपक तिवारी
– ग्राम-बसिरहा
रानीगंज,
प्रतापगढ़, उ. प्र.

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