मुम्बई से डॉ. अर्चना दुबे रीत के दोहे- सखी

*दोहा*

*सखी*

जान गवावो ना सखी, साथ रखो हथियार।
नरपिशाच जन हो गये, करना है अब वार ।। 1।।

हा हा कार मचा हुआ, छाया है आतंक ।
नर पिशाच मानव हुए, हे सखि मारे डंक ।।2।।

हालत ऐसी देखके, घर घर मचा बवाल ।
भूल न करना हे सखी, बुरा सभी का हाल ।।3।।

हे सखि कहती आज मैं, यह ले लो संकल्प ।
बदला लो हर एक से, छोड़ो नहीं विकल्प ।।

जागो फिर से हे सखी, बहुत हो गयी भूल ।
उस पापी को दंड दो, करे जूर्म कबूल।।5।।
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*डॉ. अर्चना दुबे ‘रीत’*
*मुम्बई*

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