तेजपुर,असम से सविता दास सवि की रचना-हाँ! वो तुम हो

हाँ! वो तुम हो

जो मेरे शब्दों से ज़्यादा
मेरे चुप्पी को समझे
दिखावा ना करे फिर भी
अपना समझे

वो तुम हो !

असमंजस सदा
मेरे साथ चलता है
क्या करे क्या ना करे
संशय सदा मन में
पलता है
जो मुझे निर्णय तक
ले आए

वो तुम हो!

जाने क्या ढूंढा करते हैं
जाने किस सुकन की तलाश
होती है मुझे
मेरी दृष्टि को
जो दिशा देता है

वो तुम हो!

मेरे इर्द गिर्द लोग
परखते हैं मुझे
गुण और दोष के तराज़ू में
तोलते है मुझे
मेरी सारी बुराइयों के साथ जो
जो मुझे अपनाले

वो तुम हो!

इतनी फिक्र तो मुझे
खुद की भी नही
क्या गलत क्या सही शायद
हम जानते भी नही
पर मुसीबत के सामने जो
ढाल बनकर खड़ा हो जाए

वो तुम हो!

जिसके सामने खुद को
साबित ना करना पड़े
क्या है वो मेरे लिए
बताने को शब्द ना चुनना पड़े
जो मेरे प्यार से ज़्यादा
मेरी उदासी को समझे

वो तुम, हाँ तुम हो!

सविता दास सवि
तेज़पुर,असम

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