नागपुर से फिरोज खान की ग़ज़ल

ग़ज़ल

उनके वादे और उनके ख़त,
अब काग़ज़ के तय्यारे हैं ! – 1

उससे मज़हब से ख़ौफ़ नहीं,
जिस दिल से दिल की यारी है ! – 2

एक जन्म का पक्का बंधन है,
पर इश्क़ का धागा है कच्चा ! – 3

लूट कर के तू मेरा यक़ीं ले गया,
तेरे जैसा कोई राहज़न न मिला ! – 4

जलती लौ को हवाओं से डर था मगर,
बुझ गई तो हवा का तक़ाज़ा किया ! – 5

दिल से लगे हो उनकी जाँ पे नहीं बने,
ज़्यादा न रूठिए अभी वो यार है नया ! – 6

माफ़ कर दें तो बे-शक बड़े आप हैं,
दुश्मनों को भी कोई दुआ दीजिये ! – 7

दिल में महफ़िल है, त्यौहार और जश्न है,
इश्क़ इतवार की जैसे फ़ुर्सत हुई ! – 8

दिल को कैसे बचाएं हम उन निगाहों से,
उन शिकारी आँखों का हर वार काटे है ! – 9

तेरी गर्दिश मेरे दिल में है धड़कन जैसी,
तेरा एहसास इतवार की फ़ुर्सत की तरह ! – 10

©® फिरोज़ खान अल्फ़ाज़
नागपुर , प्रोपर औरंगाबाद ,बिहार
स0स0 – 9231/2017

1 Comment

  1. आपका तहेदिल से शुक्रिया अदा करता हूं

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