पटना से राजीव रंजन शुक्ल की अभिव्यक्ति-आज हम फिर शर्मिंदा है

आज हम फिर शर्मिंदा है

क्या लिखे ,मन छुब्ध और है क्रोधित
बच कैसे जाता आरोपित
मोमबत्ती की जगह यदि आरोपित जलता
तो फिर आज क्यो निर्भया होता
आज हम फिर शर्मिंदा है
वहशीपन ,हैवानियत जिंदा है
मदद देने के नाम पर बहुरूपिया आया
मददगार का मायावी रूप बनाया
दुराचारी के कर्म से मानवता थर्राया
फिर जब कोई सच्चा मदद को आए
कैसे उस पर कोई विश्वास जताए
जाने बैठा है भेड़िया किस रूप मे
नहीं करेंगी नारियाँ विश्वास किसी पुरुष मे
कभी उन्नाव ,कभी कठुआ और कभी निर्भया
नहीं आती इन वहशियों को शर्म और हया
कब निकलेंगी बेटी और बहन
बिना डर और भय
कैसे बनेंगी हमारी बेटियाँ और बहन निर्भय
खतरे मे यदि महिला की अपनी अस्मिता एवं सम्मान
क्या नहीं है यह समाज और देश का अपमान
मोमबत्ती नहीं वहशीपन को जलाए
नहीं कोई दुराचारी ये कुकर्म दोहराए ॥

राजीव रंजन शुक्ल

11 Comments

  1. In शर्मनाक और कायराना हरकतों पर सर देश शर्मिंदा है।मानवता सो गई है,संस्कार मर चुके हैं,क्योंकि हमने पाश्चात्य संस्कृति का अनुसरण करना शुरू किया है।फिर भी पितृसत्तात्मक भारतीय संस्कृति में रक्षक ही भक्षक बन गए हैं।धिक्कार है।मानवीय मूल्यों को समझने वाली एक अच्छी कविता।

  2. अपराधी पकड़े तो जाते हैं पर पुलिस, कानून, न्यायालय की जटिल एवं लम्बी प्रक्रिया के बाद सजा होती भी है
    तो इतना वक्त गुजर जाता है कि लोग सब कुछ भूल जाते हैं। फिर फांसी की सजा के बाद राष्ट्रपति महोदय के पास लंबित क्षमा याचना। समझ नहीं आता कैसे निपटा जाय इनसे। समाज को कुछ ठोस उपाय करना होगा।

  3. सही कहा सर आपने ॥ त्वरित कारवाई ही इन विकृत मानसिकता वाले लोगों को भयभीत करेंगी ।

  4. When will we change our mentality. When will we come out from this heinous crime. Good efforts made by Shri Shukla toward change the mentality of society.

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