Devendra Soni December 2, 2019

*रूह की तलाश*

कहानी ये लम्हों की नहीं
सदियों पुराना इतिहास है
यूं ही मैं गमगीन होता नहीं
रूह भांप लेती है____
तू कहीं मौन, उदास है।

कहानी ये लम्हों की नहीं
जन्मों-जन्मों की प्यास है
बदला चेहरा,बदला जिस्म
रूह भांप लेती है_____
तू ही मेरी आस है।

कहानी ये लम्हों की नहीं
युगों युगों का सफर है
मिटता रहा हूं बार अनेको
रूह भाप लेती है_____
यहीं बसी मेरी सांस है।

कहानी ये लम्हों की नहीं
कहानी ये जिस्मो की नहीं
कहानी ये नाम की नहीं
तू रहे अनाम, अन्जान,
रूह भांप लेती है____
रूह को रूह की तलाश है।

तेजकरण जैन

Leave a comment.

Your email address will not be published. Required fields are marked*