Devendra Soni November 27, 2019

करवट बदलती सदी आमची मुंबई के चर्चा विमर्श के दौरान अशोक नगर, सीहोर तथा भोपाल से जुटे साहित्यकार.पुस्तक को मुंबई के परिदृश्य का जीवंत एवं जरूरी दस्तावेज बताया

भोपाल। शनिवार 23 नवंबर हिंदी भवन के महादेवी वर्मा कक्ष में मध्यप्रदेश राष्ट्रभाषा प्रचार समिति द्वारा आयोजित चर्चित लेखिका संतोष श्रीवास्तव की पुस्तक करवट बदलती सदी आमची मुंबई के चर्चा विमर्श के दौरान कार्यक्रम के अध्यक्ष पद्मश्री रमेशचंद्र शाह ने कहा-”
पुस्तक में जबरदस्त पाठकीय आकर्षण है। हाथ में किताब आते ही यह अपने को पढ़वा ले जाती है ।ऐसा लगता है कि संतोष की कलम से मुम्बई ने अपनी आत्मकथा लिखवाई है ।संतोष के पास एक कहानीकार की आँख है तो उन्होंने मुंबई के परिदृश्य को कहीं ज्यादा गहरे आत्मसात किया है।उसका अंतरंग पक्ष अपने आप सामने आ जाता है ।संतोष का मार्मिक योगदान है महानगर के लिए। जो जीवनी का भी रस देता है। मुझे इतनी जानकारियां नहीं थीं जबकि मेरा ससुराल मुम्बई है और मैं बरसों वहाँ रहा हूँ।”
मुख्य अतिथि डॉ जवाहर कर्णावत ने कहा-“जब कोई मुम्बई में रहकर उसको आत्मसात करता है तभी ऐसी सम्पूर्ण जानकारी युक्त पुस्तक लिख सकता है। यह मुम्बई के लिए सम्पूर्ण सन्दर्भ पुस्तक है। सभी जानकारियों से परिपूर्ण । यह पुस्तक नायक है तो गूगल सहायक। वैसे गूगल में भी इतनी जानकारी मुंबई के लिए नहीं मिलेगी जितनी इस पुस्तक में संतोष जी ने दी है। यह उनकी वर्षों की मेहनत का फल है।”
सीहोर से आए प्रसिद्ध साहित्यकार मुकेश दुबे ने कहा
“कोई शहर चंद लाइनों या नक्शों में कैद एक शहर नहीं होता, वरन एक जीवंत धड़कता स्थान होता है। मुम्बई के ऊपर दर्जनों किताबें लिखी गई पर वे अंग्रेजी में और अपूर्ण जानकारी युक्त लिखी गई। इस पुस्तक ने पहली बार समूची जानकारी हिंदी में प्रस्तुत की है। पुस्तक का एक वाक्य की “ब्रिटिश और बिल्ली इस होटल में प्रवेश नहीं कर सकते” एक विलक्षण वाक्य है। फिल्म निर्माण, भिन्डी बाजार, और पुरानी मुम्बई के मछेरों को, पारसी समुदाय, डिब्बे वालों , व्ही आई पी कल्चर और पर्यटन स्थलों को भी अपने पन्नों में जगह दी है।
अशोकनगर से आए जनवादी कवि सुरेंद्र रघुवंशी ने कहा-”
पुस्तक को पढ़ते हुए लगता है कि एक झरोखे से हम मुम्बई दर्शन कर रहे हैं, मुम्बई के इतिहास, गोपन कला, स्थापत्य, साहित्य, संस्कृति का युवाओं के संघर्ष का, कलाकारों, साहित्यकारों का इसमें विस्तार से वर्णन है। बहुत सारी जानकारियां मुम्बई के बारे में यह किताब देती है। मुंबई के पर्यटन में यह पुस्तक संदर्भ ग्रंथ के रूप में रखी जा सकती है।”
वरिष्ठ लेखिका स्वाति तिवारी ने कहा कि “मुंबई के पूरे परिदृश्य को अगर जानना हो तो इससे बेहतर कोई दूसरी किताब नहीं । सुंदर भाषा शैली में सहज मन को आकृष्ट करती मछुआरों की बस्ती से लेकर अरबपति इलाकों तक की जानकारी देती यह पुस्तक मुम्बई की मानो शोध ग्रंथ है। ”
संतोष श्रीवास्तव ने बताया कि इस किताब को मुम्बई की संपूर्ण जानकारी और पर्यटन का दस्तावेज बनाने में और शोध छात्रों के लिए संदर्भ ग्रंथ बनाने में मुझे 5 से भी अधिक साल लग गए ।”
सरस्वती वंदना सुनीता शर्मा,स्वागत भाषण जया केतकी ने, संचालन शशि बंसल ने और आभार विनीता राहुरीकर ने व्यक्त किया। बड़ी संख्या में भोपाल के साहित्यकारों, पत्रकारों और संपादकों की गरिमामय उपस्थिति दर्ज की गई ।

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