Devendra Soni November 13, 2019

ग़ज़ल

नाम ले कर जिसने आवाज़ लगायी हमको।
वो कहीं भी नही देता है दिखाई हमको।

हमने तन मन पे लपेटी बहुत दिनों लेकिन,
गर्द गलियों की तेरी रास न आयी हमको।

रात भर रात के पहलू में करवटें बदलीं,
रात भी सो गई पर नींद न आयी हमको।

एक लम्हा भी नही उम्र का काटे वो कटा,
भूल से जिस घड़ी तेरी याद न आयी हमको।

उसे अपनी ग़ज़ल में हमने जब से चाँद कहा,
तबसे देता ही नही दाग दिखाई हमको।

हुए जाते हो तुम बेबात खफ़ा उसने तो,
बात ही बात में थी बात बताई हमको।

डॉ. मीनाक्षी शर्मा
गाजियाबाद

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