Devendra Soni November 12, 2019

सैनिक की विदाई”

रहने दो माँ हाथ का हलवा,
जल्दी सरहद जाना होगा।
धरती माँ पर संकट आया,
दुश्मन मुझे भगाना होगा।

माँ मुन्ने का ख्याल तू रखना,
ज्वर की दवा खिलाना होगा।
हाँ माँ याद है, तुमको ,
फिर से औषधि लाना होगा।

माँ पत्नी के आँख मे आँसू,
क्या कर्तव्य बताना होगा।
जाने से पहले क्या मुझको,
सैनिक हूँ बतलाना होगा।

दुश्मन के हर वार के बदले,
प्रतिउत्तर तो देना होगा।
भाई बंधु व चाचा ताऊ,
सबसे रुखसत लेना होगा।

हार जीत व मृत्यु अभय हो,
मुझको लडने जाना होगा।
हवन यज्ञ मे हर सैनिक को,
अपनी आहुति देना होगा।

राजेन्द्र प्रसाद पाण्डेय
कर्वी, चित्रकूट(उत्तर प्रदेश)

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