असम से सविता दास की रचना – तुम्हारी यादें

तुम्हारी यादें

खामोश नही
रहने देती
शोर बड़ा
मचाती हैं
जबरदस्ती मुझसे
बाते करती हैं

तुम्हारी यादें

तुमसे मिली हूँ
जबसे
कुछ खिलने लगा
मन में
ये क्या सींचने लगी
बंजर मन में

तुम्हारी बातें

एहसासों का
रेशमी धागा
एक सिरा लिए
जिसका
फिरती थी तन्हा
दूसरे सिरे को
थामकर
बांधती है मुझको

तुम्हारे वादें

डरती हूँ बहुत
खोने से तुम्हे
लड़ती हूँ बहुत
हकीकत से अपने
कहीं हथेली से
रेत जैसी फिसल ना जाएँ

तुम्हारी यादें

सविता दास सवि
तेज़पुर ,असम

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