दिल्ली से सोनिया थपलियाल की कविता – रचनाकार की शक्ति


नई कविता –
शक्ति रचनाकार की

जहाँ पहुँचा ना रवि
पहुँचा वहाँ कवि
सत्य है यह कथन
प्रकाश में जो दिखता नही
साहित्यकार की नज़र से
वह कभी छिपता नही
कवि कल्पना ढूंढ कर
उसको करती है
उजागर समक्ष सबके
उधेड़कर हर कुप्रथा के
ताने-बाने रख देती है
सामने समाज के
कल्पना रचनाकार की
रखती है अदम्य साहस
छिपी हो गंदगी समाज की
घोर तम में ही कही
भस्म करती है उसे
चेतना के प्रकाश से
कवि कल्पना का वार
होता है अचूक
बचता कहाँ कोई
उसकी कलम की धार से
अक्स वह दिखाता है वही
जो चेहरे असली
होते है समाज के
फिर लाख चाहे
आडम्बरों से हो ढका
शब्दों के प्रहार से
यथार्थ वह देता है बता
सोच उसकी बदल सकती है
सोच हर इंसान की
इतनी सक्षम होती है कलम
एक रचनाकार की

सोनिया थपलियाल
नई दिल्ली

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