Devendra Soni October 16, 2019

झलक
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तेरी एक झलक पाने को ,
हर पल मन मचलता है !

हर आहट पर तेरी झलक
पाने बाधाओं को लांघ दौड़
कर तेरी एक झलक पाने
दरवाजे पे आ जाती हूं !

हवाओं में तेरी खुशबू की
महक पाने को मन मचलता है ,
तेरी एक झलक पाने मऩ़़ ़़़़़़़!

न जाने ये कैसा रिश्ता है ,
न जाने ये कैसा इश्क है ,
बिन कहे नजरों के इशारे
से इश्क का एहसास हो
जाता है तेरी एक झलक
पाने क्यू ये मन मचलता है ???

एक आदत सी ही गई है ,
तेरी एक झलक की नजरों
को एक चाहत सी हो गई है !

सुबह -शाम तेरी झलक
पाने इबादत कर दुऑ
मॉग लेती हूं तेरी सलामत
की मन्नत मॉग लेती हूं ,
न जाने क्यू तेरी झलक
पाने मन मचलता है !

अनुसुईया झा
सुरजपूर

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