Devendra Soni October 16, 2019

**अटूट बंधन का पर्व**

करवाचोथ का पर्व निकट था।बाजारो मे शहर की रौनक देखते ही बनती थी,..भीड़ का आलम चारो ओर था,..चारो ओर बडी रौनक नजर आ रही थी।चूडियो वाले दुकानदार नयी नयी वैरायटी की चूडिय़ां ले आये थे।गांव से भी भीड का रेला आ पडा था।बाजार मे पैर रखने की जगह न थी,..इसीलिये कुछ चूडी वाले रेहडी पर नयी नयी चूडियां सजा गलियो मे घूम रहे थे।
मैं बच्चो को टयूशन पढाने मे मग्न थी।शाम होने को थी।मुझे इतनी तल्लीनता से पढाते देख पतिदेव ने भांप लिया था कि अभी भी ये दो घंटे से पहले उठने वाली नही……
हार कर पतिदेव बैचैनी से टहलकदमी करते हुए बाहर आ गये।बाहर पडोस की औरते चूडियां खरीद रही थी… रेहडी पर भीड देख इनसे रहा नही गया,तो मेरे पास आकर बोले…श्रीमति जी,बाहर चूडियो वाला आया है,…अपनी पसन्द व साइज की ले लो।कल त्योहार का दिन है,उठो,,चूडियां ले लो,,मै कह रहा हूं!
मैनै पढाते हुए मुंह ऊपर कियाऔर कहा…..अब मै बाहर कैसे जाऊ?आप ही ले लो मेरे साइज की,इस पर थोडा गम्भीर होकर वो बोले……सारी उमर तो मै अपने घर परिवार की जिम्मेवारियो मे तुम्हारी ओर ज्यादा ध्यान नही दे पाया।अब मै रिटायर्ड हो गया हूं, मेरा मन करता है तुम्हे खूब खरीददारी करवाऊ,,तुम्हे नया सूट या नयी साडी दिलवाऊ,..तुम अपनी पसन्द की बढिया चूडियां पहनो।मैने हंस कर कहा,..अरे इस उमर मे कुछ भी पहन लूंगी, पर ये ना माने….मेरा हाथ खीच कर बाहर ले आये,और मेरी पसन्द की चूडियां दिलवायी।
मै मुस्करा दी।अगले दिन करवा चोथ था।उन्हे पता था मै बाजार नही जाने वाली,..स्वयं ही गली की दुकान से बिदिया व मेहन्दी की कीप ले आये,…मै सोच रही थी…अटूट बंघन से बंधा है ये करवाचोथ का पर्व,…..ये उमर नही प्यार का प्रतीक है।

रीतू गुलाटी *ऋतु*
हिसार

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