Devendra Soni October 12, 2019

तुम मुझ में जिओ

मैं जीता हूं तुम में
तुम जियो मुझ मैं
यही मेरी अभिव्यक्ति है।
यही मेरे जीवन का सार है,
मैं रहूं इस मिट्टी में या
उस अंबर की छोर में
मगर तुम जियो
मुझ में यूं
ज्यो जीती है मछली नीर में
यही मेरे जीवन का मूल तत्व है।
तुम मेरे अस्तित्व में रहो
मेरे अस्तित्वहीन
होने के बाद भी,
जो मिट्टी मैं रहेगी राख
मेरे मर मिटने के बाद भी।

राजीव डोगरा
कांगड़ा हिमाचल प्रदेश (युवा कवि लेखक)
(भाषा अध्यापक)
गवर्नमेंट हाई स्कूल,ठाकुरद्वारा।
पिन कोड 176029
Rajivdogra1@gmail.com
9876777233

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