महासमुंद से महेश राजा की लघुकथा – सुखी जीवनःएक रहस्य

लघुकथाः
सुखी जीवनःएक रहस्य
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पति फीचर राईटर थे और पत्नी बैंक में कार्य रत।एक शाम को छोटी सी बात में दोनों में बहस हो गयी।

पत्नी बडबडा कर बोली-‘”शादी को दस बरस हो गये,सुख का एक पल नसीब नहीं हुआ।”पैर पटक कर वे कोप भवन में चली गयी।पतिदेव ने सिर झटका,यह तो रोज का है।

वे लेखन कक्ष की ओर बढ गये।अचानक उन्हें याद आया कि एक महिला पत्रिका के दाम्पत्य जीवन विशेषांक हेतू सुखी जीवन के पचास टिप्स विषय पर लेख लिख कर भेजना है।

वे राईटिंग टेबल पर बैठ कर कम्प्यूटर आन कर रहे थे।

थोडी देर बाद पत्नी ने कमरे में झांका फिर वे किचन की ओर बढ गयी,काफी बनाने हेतू।

*महेश राजा*,
वसंत 51,कालेज रोड।
महासमुंद।छत्तीसगढ़।493445.

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