अमझेरा से श्याम सुंदर शास्त्री की रचना -नदी बहती है नहीं

नदी बहती है नहीं

नदी बहती है नहीं, कल-कल है कुछ कहती
शब्द बोलते नहीं, दिमाग हमारा है तौलते
बिल्ली रास्ता काट ,काटती है हमारे अपशकुन
मुसीबत है आती अकेली नहीं,
सफलता का मार्ग लाती है साथ अपने
कहावत नहीं है कोई शिकायत
वह तो है जन जन की हिफाजत
मुहावरे का मतलब नहीं है मुंह आवारा वह तो गागर में सागर है सारा
एक चना भाड़ फोड़ता नहीं
चिंगारी की आग का हैं नहीं मोल
दोस्त दुश्मन से बड़ा है होता
हर काम में आगे खड़ा है होता अपनी लकीर बढ़ी है करना
प्रगति के पथ पर है आगे चलना
प्रकृति के अनुशासन को करें अंगीकार
वसुधैव कुटुंबकम् को करें स्वीकार
स्वावलंबन ही है जीवन
निज पथ में कुछ करें समर्पण

श्याम सुन्दर शास्त्री अमझेरा

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2 Comments

  1. रचना प्रकाशन हेतु धन्यवाद उत्साह वर्धन व प्रेरणा मिलती है

    • रचना प्रकाशन हेतु धन्यवाद। । उत्साह वर्धन एवं प्रेरणा मिलती है।

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