नागपुर से फिरोज खान की ग़ज़ल

ग़ज़ल

फूल टूट न सकेगा हवाओं के झोको से
ये तो टूटेगा किसी आदमी के हांथो से

अश्क ने खींची लकीरें तेरे गालों पे
दर्द की राह निकल आई तेरे आंखो से

ढूंढता हूं जब मै अपनी ही खामोशी को
मुझे कुछ काम नहीं दुनिया की बातों से

आसमां दे ना सका चांद अपने दामन का
मांगते रह गई उसे धरती कई रातों से

©® फिरोज खान,नागपुर

Please follow and like us:
0

1 Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*