Devendra Soni October 12, 2019

ग़ज़ल

फूल टूट न सकेगा हवाओं के झोको से
ये तो टूटेगा किसी आदमी के हांथो से

अश्क ने खींची लकीरें तेरे गालों पे
दर्द की राह निकल आई तेरे आंखो से

ढूंढता हूं जब मै अपनी ही खामोशी को
मुझे कुछ काम नहीं दुनिया की बातों से

आसमां दे ना सका चांद अपने दामन का
मांगते रह गई उसे धरती कई रातों से

©® फिरोज खान,नागपुर

1 thought on “नागपुर से फिरोज खान की ग़ज़ल

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