अशोकनगर से अंकिता जैन की रचना – विचित्र दुनिया

” विचित्र दुनिया “

ये बड़ी विचित्र दुनिया है,
यहाँ, विचित्र राग गाया जाता हैं।
अपने घाव रो रो कर दिखाते,
और दूसरे के घावो पर,
नमक लगाया जाता हैं।
ये बड़ी विचित्र दुनिया हैं,
यहां विचित्र राग गाया जाता हैं।
कभी मजहब पर झगड़े होते,
तो कभी जात को मुद्दा बनाया जाता हैं,
ये बड़ी विचित्र दुनिया है,
यहां विचित्र राग गाया जाता हैं।
अपनी-अपनी ढंकते यहां,
और दूसरों का तमाशा बनाया जाता है,
ये बड़ी विचित्र दुनिया हैं,
यहां विचित्र राग गाया जाता हैं।
पैसा सर्वोच्च शक्ति यहां की,
पैसे से सबको नचाया जाता है,
ये बड़ी विचित्र दुनिया हैं,
यहां विचित्र राग गाया जाता हैं।

अंकिता जैन’अवनी’
(लेखिका/कवियत्री)
अशोकनगर(म.प्र)

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