Devendra Soni September 24, 2019

दिनकर रथ चढ रहा है

दिनकर
रथ चढ रहा है,
रश्मिरथी
मन मन में गढ रहा है ।

आओं जनता
सत्ता कि सिंहासन खाली है,
दीपक बहुत यहाँ
किंतु बिन आली है ।

यहाँ अंबर के
तारे सितारे खुशी मनाते है,
अर्जुन कृष्ण के
शब्द बाण से अकुलाता है।।

युद्ध की गती गई मारी है
बुद्ध की मती गई मारी है ।

दिनकर रथ चढ रहा है,
रश्मिरथी मन-मन में गढ रहा है ।
तमस का अंधेरा छट रहा है,
रश्मिरथी पग-पग मन में गढ रहा है ।।

अनंत धीश अमन
गया जी बिहार

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