शाजापुर से दुर्गा प्रसाद झाला की कविता – पसीना

पसीना
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पसीना
धरती की सुगंध ह़ोता है
पसीना
जीवन को जीवन देता है
पसीना
आदमी को आदमी बनाता है
पसीने से ही
यह दुनिया सुन्दर बनी है ।

इस पसीने से ही
तुम्हारी देह को
अर्थ मिलता है ।

पसीना वह नदी है
जिसमें नहाने से
आत्मा का सारा मैल
धुल जाता है
वह परमात्मा बन जाती है ।

दुर्गाप्रसाद झाला

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