Devendra Soni September 24, 2019

सरिता भ्रमण

बीता जो दिवस तो निशा फिर आई
लेकिन साथ में सोम किरण है लाई
क्षीर सी कौमदी चहुँ ओर है छाई
तटिनी तट घूमने की इच्छा हो आई
शर्वरी की वह बेला ले रही थी अँगड़ाई
पहुँच समीप सरिता जब दृष्टि घुमाई
मन हुआ प्रफुल्लित देख वो अमराई
तरंगिणी अपने दर्प में हिलोरें भी खाई
गंध दूर से मधुमास के पुहुप से आई
तभी कुछ दूर एक रमणी नजर आई
दक्षिण हस्त उसने एक ध्वजा लहराई
तब उस ध्वजा पर अपनी दृष्टि घुमाई
मैंने पढ़ा जो वहां पंक्तियाँ नजर आई
लिखा था हिन्दू_मुस्लिम_सिख _ईसाई
आपस में सब भाई_______भाई

नीरज कुमार द्विवेदी
( उत्तर प्रदेश )
272130

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