हिन्दी दिवस पर देहरादून से डॉ. भारती वर्मा बौड़ाई की दो कविताएं

हिंदी दिवस पर

१– कहती है हिंदी
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सीखें सिखायें
पढ़ें और पढ़ायें
कहती है हिंदी!

धरोहर देश की
बदलूँ परिवेश भी
कहती है हिंदी!

जीवन में भी हूँ
मृत्यु में भी हूँ
कहती है हिंदी!

मैं जननी तुम्हारी
मैं अस्तित्व तुम्हारा
कहती है हिंदी!

बोली जाती हूँ जैसे
लिखी जाती हूँ वैसी
कहती है हिंदी!

गर्व से बोलो मुझको
निज गौरव भी समझो
कहती है हिंदी!
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२– आओ…
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लड़ने के हथियार भी हैं
हिंदी सैनिक तैयार भी हैं
आओ समर लड़ें सभी!

हिंदी समर्थक बढ़ते जाते
हिंदी भाषी बढ़ते जाते
आओ सबसे कहें सभी!

मातृभाषा मेरी अमोल तुम
मेरे जीवन की माणिक तुम
हिंदी से प्रेम करें सभी!

कविता कहानी बहुत लिखे
विज्ञान पर भी कलम चले
आओ कमर कसे सभी!

कर दे मन के तार झंकृत
जन जीवन करे अलंकृत
आओ उद्यम करें सभी!

कदम न अब रुकने पायेंगे
राष्ट्रभाषा पद तक पहुँचायेंगे
आओ संकल्प करें सभी!
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डा० भारती वर्मा बौड़ाई

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