शाजापुर से दुर्गाप्रसाद झाला की रचना – मैं लिखता हूँ

मैं लिखता हूँ
—————-

मैं जो भी लिखता हूं
लगता है
रेत पर लिख रहा हूँ।

हवा में कब ,कहाँ , किधर
बह जाते हैं / लिखे शब्द
पता ही नहीं लगता ।

फिर भी
लिखता रहता हूँ
शायद कभी / कोई शब्द
धरती की गहराई में
धंस जाये बीज-सा
और अंकुरित हो
महकने लग जाए !

इस महक में
क्या अपना अर्थ
नहीं पा लूंगा ?

* *
दुर्गाप्रसाद झाला .

Please follow and like us:
0

1 Comment

  1. गुरुदेव,
    दुर्गा प्रसाद जी,बहुत सुंदर रचना। बधाई स्वीकार कीजिए।

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*