Devendra Soni September 14, 2019

मैं लिखता हूँ
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मैं जो भी लिखता हूं
लगता है
रेत पर लिख रहा हूँ।

हवा में कब ,कहाँ , किधर
बह जाते हैं / लिखे शब्द
पता ही नहीं लगता ।

फिर भी
लिखता रहता हूँ
शायद कभी / कोई शब्द
धरती की गहराई में
धंस जाये बीज-सा
और अंकुरित हो
महकने लग जाए !

इस महक में
क्या अपना अर्थ
नहीं पा लूंगा ?

* *
दुर्गाप्रसाद झाला .

1 thought on “शाजापुर से दुर्गाप्रसाद झाला की रचना – मैं लिखता हूँ

  1. गुरुदेव,
    दुर्गा प्रसाद जी,बहुत सुंदर रचना। बधाई स्वीकार कीजिए।

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