Devendra Soni September 14, 2019

“हिन्दी दिवस पर लेख ”

सबको जोड़ने वाली भाषा है हिंदी

हमारा भारत सब देशों में न्यारा है।इस मिट्टी में जन्म लेकर हमें हिन्दुस्तानी कहने का गौरव प्राप्त हुआ है। भाषाएं सभी सीखें,ज्यादा भाषा ज्ञान गर्व की बात है। पर हम एक भारतीय होने के नाते यह जरूर कहेंगे कि, महत्ता
हिंदी को देनी है ।
सर्वप्रथम उस महात्मा को नमन जिसने हिंदी भाषा को सुव्यवस्थित बनाने में पुरा जीवन समर्पित कर दिया ।
भारतेंदु हरिश्चंद्र जी खड़ी बोली के जनक माने जातें हैं और खड़ी बोली हिंदी साहित्य के एक कालखंड को उन्हीं के नाम पर भारतेन्दु युग कहा जाता है —
अतः हम सभी लोग यहाँ पर खड़ी बोली का ही प्रतिनिधित्व करतें हैं। इस नाते उनको याद करना हम सभी लेखकों की न केवल ज़िम्मेदारी है बल्कि पुनीत कार्य भी है ।
वास्तव में उनके पस राष्ट्र के सर्वांगीण विकास की सोच थी जिसमें सबको जोड़ने वाली एक भाषा हो हिंदी!!
भारतेंदु हरिश्चंद्र आधुनिक हिंदी के पितामह- जिनकी जिंदगी लंबी नहीं बड़ी थी ।
भारतेंदु हरिश्चन्द्र को केवल 34 साल की आयु मिली ,लेकिन इतने ही समय में उनहोंने गद्य से लेकर कविता, नाटक और पत्रकारिता तक हिंदी का नक्सा बदल कर रख दिया।
हमें मालुम हो या न हो लेकिन यह सच है कि आज का हिंदी साहित्य जहाँ खड़ा है उसकी नींव का ज्यादातर हिस्सा भारतेंदु हरिश्चंद्र और उनकी मंडली ने खड़ा किया था।
उनके साथ पहली बार वाली उपलब्धि जितनी बार जुड़ी है ,उतना बहुत ही कम लोगों के साथ जुड़ पाती है ।इसलिए कई आलोचक उन्हे हिंदी साहित्य का महान ” अनुसंधानकर्ता भी मानते हैं। ऐसी महान विभूति का जन्म
नौ सितबंर 1850 को वाराणसी में हुआ था।
भारतेंदु एक श्रेष्ठ पत्रकार भी थें।
उन्होंने बालाबोधनी , कविवचन सुधा और हरिश्चन्द्र जैसी पत्रिकाओं का संपादन कर देश प्रेम विकसित करने की कोशिश किया करते थें।
भारतेंदु ने न केवल विद्याओं का सृजन किया बल्कि वे साहित्य की विषय – वस्तु में भी नयापन लेकर आएं, इसलिए उन्हे भारत में नवजागरण का अग्रदूत माना जाता है ।
उन्होंने अपनी लेखनी से लोगों में अपनी संस्कृति और भाषा के प्रति प्रेम की अलख जगाने का प्रयास किया।
इस वज़ह से उनकी पत्रिका लोगों में हिंदी के प्रति अभिरुचि विकसित करने में कामयाब हुयी । जय हिंद जय भारत!!

स्वरचित मौलिक रचना
सर्वाधिकार सुरक्षित
रत्ना वर्मा
धनबाद-झारखंड

13 thoughts on “धनबाद से रत्ना वर्मा का लेख – सबको जोड़ने वाली भाषा है हिंदी

  1. हिंदी दिवस पर एकदम उपयुक्त लेख …. लेखिका को बधाई !

    1. हिन्दी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं भाई आपकों भी।
      बहुत हार्दिक स्नेह

  2. संपादक युवा प्रवर्तक भाई देवेन्द्र सोनी जी को हमारी रचना प्रकाशित करने हेतु बधाई

    1. जी त्रृषि त्यागी जी आपको भी हिंदी दिवस की बधाई
      व सुभकामनाएँ

    2. जी त्रृषि त्यागी जी आपको भी हिंदी दिवस की बधाई
      व सुभकामनाएँ

  3. बहुत सुन्दर आलेख की प्रस्तुति। हिंदी दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।

  4. हार्दिक आभार सर, आपकी प्रतिक्रिया की अपेक्षा थी ।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ जय हिंद जय भारत!!

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