मुम्बई से डॉ अर्चना दुबे की रचना – भाषा

*हिंदी दिवस के अवसर पर*
*कविता – भाषा*

भाषा और भाषा में
कैसी ये टकराहट है
हिंदी और अंग्रेजी को लेकर
सबकी कितनी चाहत है।

स्वर व्यंजन में भेद नहीं है
बात यही सब जानते हैं
ए बी सी डी कहा से आयी
राज है इसमें मानते है ।

क को सब पढ़ते है कैसे
अंग्रेजी में के सी से
इसके बाद भी क्यू से क है
सीखों इसे विदेशी से ।

बदल है जाता हर एक अक्षर
हिंदी का अंग्रेजी में
माता को माटा भी कह लो
यही सीख अंग्रेजी में ।

फिर भी कितनी अकड़ है
हिदुस्तानी लोगो में
सीख के अंग्रेजी की भाषा
कहते पीटा माटा है ।

शब्दों के अर्थों को देखों
वाणी में बदलाव हुआ
धरती माता के हो वंशज
इसका भी कुछ भान रहा ।

डॉ. अर्चना दुबे

(स्वचरित व अप्रकाशित)
मुम्बई

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