Devendra Soni September 13, 2019

हिन्दी पर दोहे

हिन्दी मिसरी की डली, सरगम की झंकार।
हिन्दी तो मनमोहिनी, अनुरागी संसार।

हिन्दी भाषा में सभी, कला ज्ञान विज्ञान।
सबसे पहले हम करें, इस भाषा का मान।

देवनागरी लिपि अथक, अनुपम अनिश अनन्य।
हिन्दी के उपकार से, कौन नहीं है धन्य।

दिशा-दिशा में हो रहा, हिन्दी का विस्तार।
हिन्दी भारत ही नहीं, बोल रहा संसार।

हिन्दी से संकोच क्यों, बोलें इसे सगर्व।
हिन्दी से सुरभित रहें,पल पथ परिसर पर्व।

रशीद अहमद शेख ‘रशीद’

2 thoughts on “इंदौर से रशीद अहमद शेख ‘रशीद’ के हिन्दी पर दोहे

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