इंदौर से रशीद अहमद शेख ‘रशीद’ के हिन्दी पर दोहे

हिन्दी पर दोहे

हिन्दी मिसरी की डली, सरगम की झंकार।
हिन्दी तो मनमोहिनी, अनुरागी संसार।

हिन्दी भाषा में सभी, कला ज्ञान विज्ञान।
सबसे पहले हम करें, इस भाषा का मान।

देवनागरी लिपि अथक, अनुपम अनिश अनन्य।
हिन्दी के उपकार से, कौन नहीं है धन्य।

दिशा-दिशा में हो रहा, हिन्दी का विस्तार।
हिन्दी भारत ही नहीं, बोल रहा संसार।

हिन्दी से संकोच क्यों, बोलें इसे सगर्व।
हिन्दी से सुरभित रहें,पल पथ परिसर पर्व।

रशीद अहमद शेख ‘रशीद’

Please follow and like us:
0

2 Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*