Devendra Soni September 11, 2019

झुर्रियां

झुर्रियां
नहीं सिर्फ सलवटें
निबंध है,जिंदगी का
कितनी बदली है करवटें
सुख-दुख के थपेड़े
उभर आते हैं,बनकर
छाप, मुहर सी झुर्रियां
अनकहे प्रश्नों का उत्तर
गुजरे बीते संघर्ष
अतीत की मौन
कहानी है, झुर्रियां
टूटते,दुखते,झुकते शरीर के
मौत का पैगाम
एक संदेशा है झुर्रियां
कोई तो है
जो पढ़ता, समझता, कुरेदता है
झुर्रियां
और समेटता झुर्रियों के अनुभव
संवारता अपना जीवन
बनता है झुर्रियों का
हमदम,हरदम,मरहम

तेजकरण जैन
491666
राजनांदगाँव
छत्तीसगढ़

Leave a comment.

Your email address will not be published. Required fields are marked*