नागपुर से गायत्री शर्मा चेतना की अभिव्यक्ति – मेरे गुरू

  *गजल*

       *मेरे गुरू*

दिये से सदा जगमगाये मेरे गुरू।
खुशियाँ सारी कदमों मे पाये मेरे गुरु।।

ज्ञान के भंडार से झोली भरे शिष्य की।
अंधेरे जीवन मे रोशनी फैलाये मेरे गुरू।।

उँच-नीच, अमीर-गरिब का भेद न करे।
भटके हुए को राह दिखाये मेरे गुरू।।

शिष्य की सफलता मे खुद को सफल माने।
ज्ञान की सदा नदियाँ बहाये मेरे गुरु।।

गुरू के आशीष से नामुमकीन मुमकीन होवे।
हर मुश्किल को आसान बनाये मेरे गुरू।।

भूले से भी भूल नही पायेंगे ज्ञान की मूरत को।
पल-पल, हरपल मुझे याद आये मेरे गुरू।।

गुरु के चरणों मे दुनिया मेरी ‘चेतना’।
शिष्य को सफलता के शिखर पर पहुचाये मेरे गुरू।।

     स्वरचित
     – गायत्री शर्मा “चेतना”
         दत्तावाडी़, नागपूर

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