धनबाद से रत्ना वर्मा का लेख – गुरु शिष्य परंपरा बनी रहे

“शिक्षक दिवस पर लेख ”

गुरु शिष्य परंपरा बनी रहे

जैसा कि आप सभी जानते हैं, इस देश के द्वितिय राष्ट्रपति डाॅ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिन पर शिक्षक दिवस भारत में मनाया जाता है ! जब कि अंतराष्ट्रीय शिक्षक दिवस 5 अक्टूबर को दुनिया भर में मनाया जाता है। शिक्षकों के प्रति जागरूकता लाने के मकसद से
इसकी शुरूआत की गयी थी ।
वैसे माना जाए तो गुरु शिष्य परंपरा सदियों पुरानी है जिसका उल्लेख हमें महाभारत के विविध
प्रसंगों में मिलता है ।
हर व्यक्ति के जीवन में उतार – चढ़ाओ आते ही रहते हैं, हमारा तात्पर्य विधार्थियों के भविष्य के प्रति है , कुछ विधार्थी ऐसे भी हैं …जो पढ़ना तो चाहते हैं, पर
शिक्षा ग्रहण करने की उम्र में …दैनिक रोजगार कर रहें हैं। उनके प्रति शिक्षकों को उदारता दिखलानी चाहिए पर आज शिक्षकों में इसका अभाव साफ़ दिखाई दे रहा है।
देश भर में शिक्षा क्षेत्र में कई ऐसी संस्थाएं हैं– जो कोचिंग सेन्टर के नाम से मशहूर है। इस शिक्षा संस्थानों से शिक्षक दस से पंद्रह लाख से भी ज्यादा रूपये कमा रहें हैं। इसमें मिहनत और कला दोनों रहते हुए भी , वास्तव में जो बाजार है वहां सबकुछ बिक रहा है ।
हम ये नहीं कहेंगे ये गलत है –
हम इसे विधार्थियों के उज्जवल भविष्य का नाम देंगे पर ,
ऐसा कौंन सा व्यापार है जो संभव नहीं! थोड़ा आँखे खोलने की आवश्यकता है— जिससे शिक्षा के क्षेत्र में गरीबों को भी मदद मिल सकें और गुरु शिष्य परंपरा बनी रहे !!


स्वरचित मौलिक रचना
सर्वाधिकार सुरक्षित
रत्ना वर्मा

धनबाद-झारखंड

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11 Comments

  1. हमारे लेख को स्थान देने हेतु युवा प्रवर्तक संपादक आदरणीय देवेद्र सोनी जी को हार्दिक आभार प्रकट करती हूँ साथ ही शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं देती हूँ।

  2. इक दूजे का शिष्य हुआ,इक दूजे का अब गुरु हुआ

    देखो अब स्वर्ग से हे अजुन ! यह समर शेष अब शुरु हुआ।

    • जी बहुत ही सुन्दर प्रतिक्रिया आपकी आदरणीय राजेश पाठक जी ।शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं आपको, जय हिंद!!

    • जी त्रृषि त्यागी जी प्रतिक्रिया के लिए तहे-दिल से शुक्रिया साथ शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं ।

  3. आपकी प्रतिक्रिया से हमें वो बल मिलता है जो हमें
    और अच्छा लिखने को प्रेरित करता है । हार्दिक शुभकामनाओं के साथ शुभ संध्या उषा जी ।शुक्रिया!!

    • जी सादर सम्मान सर अनिरूद्ध कुमार सिंह जी
      आपकी प्रतिक्रिया से बहुत संतुष्ट हुई, सादर आभार!!

  4. निष्कर्षतः इस लेख से रत्नाजी ने आज के गुरु-शिष्य दोनों की युग चेतना व सशक्त समाज के निर्माण प्रति जवाबदेही पर जोर देकर बहुआयामी विचारधारा पेस की है !
    लेखिका बधाई की अधिकारी ! 💐💐💐

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