गणेश के स्वरूप में छिपा मनुष्य जीवन का रहस्य- भवानी मंडी से राजेश कुमार शर्मा”पुरोहित” का लेख

लेख
*गणेशावतार की कथा*

*गणेश के स्वरूप में छिपा मनुष्य जीवन का रहस्य*

संदर्भ:- गणेश चतुर्थी,2 सितम्बर

शिवपुराण के अनुसार भाद्रपद मास के कृष्णपक्ष की चतुर्थी को हम प्रतिवर्ष गणेश जी का जन्म दिन ,गणेश चतुर्थी के रूप में मनाते हैं। गणेश पुराण के अनुसार गणेशावतार का अर्थ है गण और पति यानी गणपति । संस्कृत भाषा मे गण का अर्थ है पवित्रक। पति यानी स्वामी। गणपति का अर्थ हुआ पवित्रकों के स्वामी। शिवपुराण के अनुसार रुद्रसंहिता के चौथे खण्ड में वर्णन मिलता है कि माता पार्वती ने स्नान करने से पूर्व अपनी मैल से एक बालक को उतपन्न कर उसे अपना द्वारपाल बनाया था। उसने शिवजी को जाने से रोका। इस पर नाराज होकर उस बालक पर शिवगणों ने प्रहार किए। भयंकर युद्ध किया। परन्तु संग्राम में उस बालके को कोई भी हरा न सका। अंत में भगवान शिव ने क्रोध करते हुए अपने त्रिशूल से उस बालके का सिर काट दिया। इससे पार्वती क्रोधित हो गई और उन्होंने प्रलय करने की ठान ली। भयभीत सभी देवगणों ने देवऋषि नारद के कहे अनुसार जगदंबा की स्तुति कर उन्हें शांत किया। शिवजी के निर्देश पर विष्णु हाथी का सिर ले आये। मृत्युंजय रुद्र ने गज के उस मस्तक को बालक के धड़ पर रखकर उसे पुनर्जीवित कर दिया। माता पार्वती ने हर्षातिरेक से गजमुख बालक को ह्रदय से लगा लिया। और देवताओं ने अग्रणी होने का आशीर्वाद दिया। ब्रह्मा विष्णु महेश ने उस बालक को सर्वाध्यक्ष घोषित किया और अग्रपूज्य होने का वरदान दिया।
भगवान शंकर ने कहा गिरिजानंदन विध्न नाश करने में तेरा नाम सर्वोपरि होगा। तू सबका पूज्य बनकर मेरे समस्त गणों का अध्यक्ष हो जा। गणेश अब गणपति हो गए। सभी गणों के स्वामी बन गए। वर्षपर्यंत जो गणेश चतुर्थी का व्रत करेंगे उसकी सभी मनोकामनाएं अवश्य पूर्ण होवेगी। भाद्रप्रद मास की कृष्णपक्ष की चतुर्थी की रात्रि में चंद्रोदय के समय गणेश तुम्हारी पूजा करने के बाद व्रती चन्द्रमा को अर्ध्य देकर ब्राह्मण को मिष्ठान खिलाना चाहिए। तदुपरांत स्वयं भी मीठा मीठा भोजन करें।
बुद्धि के देवता प्रथम पूज्य देव गणेश को गणपति,गिरिजानंदन, वक्रतुंड, लंबोदर, उमासुत, विनायक, गजराज गणनायक गणाधिपति, गजानन,। हिन्दू धर्म मानने वाले गणेश जी के अन्यन्य उपासक है। यूँ तो गणेश चौथ पूरे भारत मे मनाते है लेकिन इसे महाराष्ट्र प्रान्त में विशेष ही मनाते है। मुम्बई की गणेश चतुर्थी देखते ही बनती है। बड़े बडे फिल्मी सितारे अपने घरों पर गणेश जी ला कर गणेश स्थापना करते हैं। नो दिनों बाद गणपति विसर्जन करने जाते हैं। घर घर गणपति विराजित हो जाते हैं। इस गणेश उत्सव का समापन तो अनंत चतुर्दर्शी को होता है।
गणेश जी का स्वरूप भी हमें शिक्षा देता है। इनकी लम्बी सूंड महाबुधित्व का प्रतीक है। लम्बोदर का अर्थ गणेश जी से सीखो जो हर अच्छी बुरी बात को पचा देते हैं। बुद्धि के द्वारा हम समृद्धि प्राप्त कर सकते हैं। और सबसे बड़ी समृद्धि प्रसन्नता है। बड़े कान है गणेश जी के इन्हें गजकर्ण भी कहते हैं। लम्बे कान वालों को भग्यशाली कहा जाता है। इसीलिए गणेश जी शुभ फल दाता है। गणेश जी हम सब भाग्य विधाता है। गणेश जी के कान सूप की तरह है। सूप जो है सार सार को ग्रहण करता है। कूड़ा करकट उड़ा देता है। मनुष्य को सुननी सबकी चाहिए। लेकिन अपनी बुद्धि विवेक से किसी कार्य को पूर्ण करना चाहिए। गणेश जी के एक हाथ मे मोदक है। मोदक को महाबुद्धि का प्रतीक माना गया है मोदक का निर्माण अमृत से हुआ है। मोदक बन जाने के बाद वह अंदर से दिखाई नहीं देता। उसमे क्या क्या मिला है। इसी तरह पूर्ण ब्रह्म भी माया से ढंका होने के कारण हमें दिखाई नहीं देता है। गणेश अंकुश धारी है। प्रत्येक व्यक्ति के जीवन मे अंकुश की आवश्यकता होती है। चंचल मन को बिना अंकुश से काबू नही किया जा सकता है न।
गणेश जी एकदंत वाले है लेकिन गणेश जी ने एक दंत से इतनी बड़ी महाभारत लिख दी। हमे शिक्षा लेनी चाहिए कि जो है हमारे पास उसे बड़ी दक्षता के साथ काम मे लें। रोना नहीं रोवें ये नहीं हमारे पास। अब हम कैसे करें। वरमुद्रा में गणेश जी सत्वगुण के प्रतीक हैं। गणेश जी के उपासक को रजोगुण तमोगुण सतोगुण से ऊपर उठकर एक विशेष आनंद का अनुभव होता है।
आओ गणेश जी के जीवन से हम कुछ सीखें ओर अपना जीवन सफल बनायें।

राजेश कुमार शर्मा”पुरोहित”
श्रीराम कॉलोनी भवानीमंडी

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