पटना से राजीव रंजन शुक्ल की कविता – शिकायत

शिकायत ज़िंदगी से

शिकायत ज़िंदगी से क्या करूँ
जब कुछ अच्छा होने की होती है आस
नहीं रहने देती खुशियों को अपने पास
लक्ष्य को कर हमसे दूर
करती फिर कोशिश करने को मजबूर
शायद चाहती है ज़िंदगी की
अभी और भी आगे है इसे जाना
बड़े लक्ष्य को है पाना
शिकायत करूँ या शुक्रिया
ये ज़िंदगी
है तू अबूझ पहेली
तुम्हारे “ न ” मे भी
शायद कुछ “हाँ ” ही है छुपी रहती

राजीव रंजन शुक्ल

Please follow and like us:
0

1 Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*