इंदौर से मनोज कान्हे की रचना – राष्ट्र् विरोधी सर्पों के फन, अब कुचले जाएंगे

राष्ट्र् विरोधी सर्पों के फन,
अब कुचले जाएंगे

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सौ सौ चूहे खाकर बिल्ली
शाकाहार का पाठ करें ।
मानवता के हत्यारे भी,
दया-धर्म की बात करें ।
कर्ज नमक का ना समझे जो,
वो अधिकारों की मांग करे ।
सेना पर पत्थर बरसाते,
और भोलेपन का स्वांग करे ।

बहुत सहा है अब तक हमने,
अब हम ना सह पाएंगे,
राष्ट्र् विरोधी सर्पों के फन,
अब कुचले जाएंगे ।
तू भी सुन ले ‘नापाक पडौसी’,
अब भी तू ना जो सुधरा तो,
लाहौर,कराची,रावलपिंडी तक,
हम अब तांडव कर जाएंगे ।

अहिंसा मार्ग के अनुयायी,
हिंसा की ना बात करें,
हम ऋषी-मुनियों के वंशज,
“वसुधैव कुटुंबकम” मे विश्वास करे ।
संदेश यही हम अपना आज,
पूरी दुनिया को पहुंचाते है,
जाती,पंथ और धर्म से पहले,
हम भारत माँ को शीश झुकाते है ।

@ मनोज कान्हे ‘शिवांश’

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