कटनी से पेंटर मदन की दो ग़ज़ल

दो ग़ज़लें ▪पेन्टर मदन

( एक )

चल हसीं रात है |
फिर वही बात है ||

आ गई याद जब ~
महकता गात है ||

निचोड़े रेत क्या ~
भला औक़ात है ||

पलक से दरद की ~
हुई बरसात है ||

तोप को जीत ली ~
नज़र से मात है ||

रूह से आज ख़ुद ~
की मुलाकात है ||

( दो )

मन भाया कौन है |
घर आया कौन है ||

कुटिया के चैन को ~
तड़पाया कौन है ||

रोटी औ दाल को ~
हथियाया कौन है ||

नज़रों की घात से ~
बच पाया कौन है ||

धोखे से घाव को ~
सहलाया कौन है ||

चाहत में नेह को ~
तरसाया कौन है ||

फूलों की देह को ~
हुलसाया कौन है ||

मु०+पो० – उमरियापान
जि० कटनी ,मध्यभारत
पिन कोड – ४८३३३२
मोबा : ९९९३४०६५१३

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