स्वतन्त्रता दिवस की पूर्व संध्या पर सरस काव्य निशा आयोजित

स्वतन्त्रता दिवस की पूर्व संध्या पर सरस काव्य निशा आयोजित

“तिरंगा जिनकी सांसों में बसा वो डर नहीं सकते
दिलों पर राज करते हैं वो कभी मर नहीं सकते”

छिंदवाड़ा – मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद द्वारा संचालित जिला इकाई पाठक मंच के तत्वाधान में सेवानिवृत्त न्यायाधीश केशव प्रसाद तिवारी के निवास पर आजादी का महापर्व स्वतंत्र दिवस तथा रक्षा बंधन की पूर्व संध्या पर एक सरस काव्य निशा का आयोजन किया गया कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ कवि रत्नाकर रतन ने किया तथा कार्यक्रम के अध्यक्ष डॉ कौशल किशोर श्रीवास्तव और कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री केशव प्रसाद प्रसाद तिवारी थे कार्यक्रम का शुभारंभ नवोदित कवि स्वप्निल गौतम द्वारा प्रस्तुत मां सरस्वती की वंदना से हुआ ! कवियत्री अनुराधा तिवारी ने देश भक्ति कि अपनी इस कविता से समां बाँधा
“तिरंगा जिनकी सांसों में बसा वो डर नहीं सकते
कदम जो बढ़ गए आगे गए आगे पीछे धर नहीं सकते
हमें है नाज भारत के हर शहीदों पर
दिलों पर राज करते हैं कभी वो मर नहीं सकते”
छोटी छोटी लाइनों के माध्यम से बेहद सटीक और सारगर्भित बात कहने वाले कवि राजेंद्र यादव ने नया माहौल दिया
“भले मोहताज सही मगर मोह ताज का है पंख बख्से ही नहीं पर हौसला परवाज का है”
ग़ज़ल की दुनिया के उम्दा शायर मुबीन जामीन ने माहौल बदला
” हमको खुद करना है फूलों की हिफाजत
वरना अपने गुलशन से यह रानाई चली जाएगी”
अपने अपने सरल अंदाज में लोक भाषाओं में बात करने वाले कवि एवं आकाशवाणी के पूर्व पूर्व उद्घोषक अवधेश तिवारी ने कविताओं के माध्यम से चुटकी ली
“जनता ढीली हो गई
तो नेता ढीले जान
खटिया ढीली होत है
यदि ढीली अदवान”
बुंदेलखंडी गीतो को अपने मधुर कण्ठ के माध्यम प्रस्तुत करते हुए कवियत्री सविता श्रीवास्तव अपने गीत से तालियां बटोरी!
“अब के साहुन में तुम अइयो
बीरन हम कह रये है
मीठा और रुमाल तुम्हारे
घर में हम रख रयेे हैं
हमने भेजे राखी डोरा राखी डोरा
ने चिट्ठी पतरा रे
घर मे घुस रये बिना बुलाये
पाहुन से बदरा रे
बरस बरस के रीते हो गए
साहुुन के बदरा रे
घर में घुस रहे बिना बुलाए
पाहुनन से बदरा रे”
कार्यक्रम का संचालन कर रहे हैं कवि रत्नाकर रतन ने अपनी प्रतिनिधि कविता से कार्यक्रम को गति दी
“तुमने गीतों को छूकर
हर्फ हर्फ़ पावन कर डाला
और पीर हृदय की ऐसी बाटी
कि आंखों को सावन कर डाला”
कवि विशाल शुक्ल ने भारत माता पर अपनी चर्चित कविता के माध्यम से वाहवाही लूटी
“जनसेवकों को
समाज सेवा के काम पर
लोगो को धर्म के नाम पर
जब जब लड़ते पाया
तो मेरी आँखों मे
भारत माता का
करुण चेहरा उभर आया
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केशव प्रसाद तिवारी ने वर्षा का स्वागत करते गीत से मंच को ऊंचाइयां दी
“मेघा उमड़ उमड़ कर आये
नील गगन पर बादल छाये
अंतस पे कुछ पिघल गया है”
मन का मौसम बदल गया है”
वरिष्ठ कवि डॉक्टर कौशल किशोर ने देश प्रेम से ओतप्रोत रचना के जरिये देश के अलग वर्ग पर प्रहार करते दाद बटोरी!
“स्विस बैंक में उनका भारत
अपना है खलिहानों में
उनका डिस्कोथीकों में है
अपना वीर जवानों में
शान हमारी हिन्दी, उनकी
इंग्लिश में पहचान अलग।
अपना हिन्दुस्तान अलग है
उनका हिन्दुस्तान अलग।।
आजादी की वर्षगाँठ और रक्षाबंधन पर्व की पूर्व संध्या पर चुनिन्दा कवियों को लेकर आयोजित इस गोष्ठि में नवोदित कवि चित्रेश श्रीवास्तव, कल्पना तिवारी, सोनू तिवारी ने भी अपना रचना पाठ कर काव्य यात्रा की शरुआत की !

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