छिंदवाड़ा से डॉ. कौशल किशोर श्रीवास्तव की कविता – बंधन

रक्षा बंधन पर विशेष कविता
बन्धन

बन्धन तो मन के होते है
पूरे जीवन के होते है
जैसे शचि का मध्वन से था
या रघुवीर का लखन से था
कृष्णा का श्याम किशन से था
मन के सब बन्धन होते है
बन्धन तो मन के होते है
सूत्रों का बन्धन क्या होगा
मंगल का बन्धन क्या होगा
रक्षा का बन्धन क्या होगा
ये तो सब तनके होते है
बन्धन तो मन के होते है
भाई को बहन सूत्र बांधे
भाई तरुवर को बांधे
मानव हर जीवन को बांधे
ये रक्षा बन्धन होते है
बन्धन तो मन के होते है
हम तरुओं को जीवन देंगे
वे हमको ऑक्सीजन देंगे
आशीष हमें हर क्षण देंगे
बन्धन हर क्षण के होते है
रिश्ते कंचन से होते है
बन्धन तो मन के होते है।

(स्वरचित मौलिक प्रकाशित)
डॉ कौशल किशोर श्रीवास्तव
171 विशु नगर , परासिया मार्ग
छिंदवाड़ा 480001
मोबाइल 9424636145

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