आत्म संतुष्टि का सुखद एहसास है मित्रता – अंनत धीश अमन,गया जी

मित्रता एक ऐसा रिश्ता है जिससे आत्म संतुष्टि का सुखद एहसास विचलित मन पाता है

शिव हरे शिव राम सखे प्रभो त्रिविधतापनिवारण निवारण है विभो ।। यह पंक्ति आत्मा से परमात्मा को अभिव्यक्त करती है मित्र को स्मरण करने मात्र से ही तिन लोक के ताप से भी निवारण होता है ।।

मित्र है कौन ?? इसको परिभाषित करना बड़ा ही कठिन है क्योंकि मित्र हवा है मित्रता एहसास है ।। किंतु यह जरुर कहा जा सकता है मित्र के अनुरूप हम जरुर ढल जाते है मित्र अच्छे है तो जीवन का जय जयकार होता है और मित्र बुरे हो तो जीवन में अंधकार होता है ।।
मित्र कृष्ण हो तो अर्जुन महाभारत का रण भी जीत सकता है, और मित्र दुर्योधन हो तो कर्ण भी हार सकता है ।। मित्र सुदामा होता तो अकेले चना छूप छूप के खा सकता है ।। और मित्र कृष्ण हो तो दुख ताप हर सकता है ।।

एक कहावत अंग्रेजी की मैंने पढी make few friends और एक हिंदी में मुझे मेरे दोस्तो से बचाओं ।। सच्चा मित्र एक भी है तो जीवन स्वर्ग हो सकती है और मित्र सच्चा न हो तो जीते जी जीवन नर्क हो सकती है ।।

मित्रता एक विश्वास की डोरी है जहाँ एक छोटा से शक में भी विश्वास कि डोरी टूट जाती है ।।
अशफाक और बिस्मिल के दोस्ती को हम पढते है और उनके मित्रता कि दुहाई हम सभी देते है ।।

ऐसे कई लोग है जो मित्रता के रिश्ते को अटूट करते है हम सभी को मित्रवत व्यावहार संपूर्ण विश्व से करना चाहिए ।। और मित्र जो सच्चा होता है वह आपको आपसे बेहतर जानता है ।।

मित्रता है एक अनमोल गहना
कभी भी ना इसे तुम ठगना,
विश्वास की डोर में चमकता है
विश्वासघात कभी भी ना सहता है ।।

मिल जाए तो परमात्मा है
न मिले भी तो ये आत्मा है
शरीर का पार्थ है
ह्रदय में सबके साथ है ।।

जान गए तो कृष्ण है
न जाने तो ये दुर्योधन है ।।।

अनंत धीश अमन
गया जी बिहार

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