सुपौल, बिहार से रीमा आंनद की अभिव्यक्ति – किसी नायाब तोहफे से कम नहीं होती है सच्ची दोस्ती

किसी नायाब तोहफे से कम नहीं होती है सच्ची दोस्ती

“हर परेशानी जो कर देता आसान है, इसी का तो दोस्ती नाम है।। ”

जिंदगी के तमाम रास्ते जब बंद लगने लगे, परेशानियाँ कम होने का नाम न ले, हर तरफ से निराश हो जाए मन, आशा की कोई किरण न नजर आए तब भी जो आपके साथ खड़ा रहता है वही है दोस्त, हाँ सच्चा दोस्त।
वह खड़ा रहता है अपनी मुस्कान के साथ, अपने होसलों से भरे शब्दों के साथ, जिंदगी में उतार_ चढ़ाव से न घबराने की नसीहतों के साथ। जब एक दोस्त मुश्किल घड़ी में साथ होता है तब हर समस्या छोटी लगती है।
याद रखिये दोस्त अमीर हो या गरीब इससे फर्क नहीं पड़ता। उसकी दोस्त के प्रति भावना महत्व रखती है। पैसों से की गई मदद तो हम फिर भी चुका देते हैं लेकिन साथ निभाने का जो हौसला देता है उसे कभी चुकाया नहीं जा सकता। एक सच्चा दोस्त बस यही करता है। खुशी के वक़्त साथ मस्ती करना, परेशानियों के आने पर मिलकर उससे निपटना। दोस्त के अनकहे दर्द समझ लेना, बहते आंसुओं को रोक लेना और थके मन को ये कहकर संबल देना कि क्यों फिक्र करता है, मैं हूँ ना! सब ठीक हो जायेगा। बस यही वो लाइन होती है जब हर परेशानी छोटी और दोस्ती बड़ी हो जाती है।

साउथ अमेरिका से हुई शुरुआत-
हर साल अगस्त माह के पहले रविवार को फ्रेंडशिप डे मनाया जाता है। दोस्ती, मित्रता को समर्पित यह दिन अब भारत में भी लोकप्रिय हो गया है। 20 जुलाई 1958 को साउथ अमेरिका में पहली बार इस दिवस को मनाया गया। वर्ष 1930 में ही हॉलमार्क कार्ड के संस्थापक जॉयस हॉल ने इस दिवस को मनाने का प्रस्ताव रखा था। यह दिवस आज की तारीख में न सिर्फ साउथ अमेरिका बल्कि भारत, नेपाल और बांग्लादेश में भी चर्चित दिवसों में से एक है। इस वर्ष फ्रेंडशिप डे 4 अगस्त को मनाया जायेगा।

कहने को हैं दोस्त कई – आज के दौर की बात करें तो दोस्त बनते तो आसानी से हैं, एक नहीं कई सारे। लेकिन जब दोस्ती निभाने का मौका आता है तब जो किनारा पकड़ लें वैसे दोस्त की दोस्ती किस काम की? अच्छा या बुरा जैसा भी वक़्त आए दोस्त कभी न बदले, उसका प्यार न बदले। कई सारे मित्र से कहीं अच्छा है कम हों दोस्त पर भरोसे पर खड़े हों।

दोस्ती के नाम पर होता है व्यापार भी – फ्रेंडशिप डे के एक हफ्ते पहले से ही बाजार गर्म हो जाता है। फ्रेंडशिप बैंड, कार्ड, ब्रेसलेट, टेडी बीयर जैसे गिफ्ट आईटम से बाजार की रौनक बढ़ जाती है। चहल – पहल देखते ही बनती है। हर कोई अपने दोस्त के लिए अच्छे से अच्छा गिफ्ट खरीद लेना चाहता है। सच ही तो है आपके तोहफे से दोस्त के चेहरे पर जो चमक आती है वह कितनी कीमती है ये बस उसका दोस्त ही समझ सकता है।

रीमा आंनद, सुपौल, बिहार

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