बैंक राष्ट्रीयकरण (19जुलाई) दिवस पर कानपुर से हमीद कानपुरी का आलेख

बैंक राष्ट्रीयकरण (19जुलाई) दिवस के अवसर पर विशेष

आज बैंकों के राष्ट्रीयकरण के 50 साल पूरे हो गये। 19 जुलाई 1969 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश के 14 प्रमुख बैंकों का पहली बार राष्ट्रीयकरण किया था. इसके बाद साल 1980 में छह बैंकों का राष्ट्रीयकरण हुआ। इंदिरा गांधी की गरीबी हटाओ योजना से लेकर नरेन्द्र मोदी की महत्त्वाकांक्षी योजना मुद्रा लोन तक सभी योजनाओं का क्रियान्वयन इन सरकारी बैंकों के कर्मचारियों ने बड़े उत्साह के साथ किया है। सबसे अभूतपूर्व कार्य नोटबन्दी के 54 दिनों मे इन बैंकों और कर्मचारियों ने करके दिखाया। देश के सरकारी तंत्र की शायद ही कोई भी इकाई (सेना को छोड़कर) 36 घंटे के नोटिस पर ऐसा काम नहीं कर सकती जैसा इन सरकारी क्षेत्र के बैंकों ने कर दिखाया।

आज बैंक के सेवानिवृत कर्मचारी होने के नाते मुझे गर्व है कि हमने बिना किसी भेदभाव से देश के हर कोने में समाज के हर वर्ग के लोगों को आर्थिक मजबूती प्रदान की। उनके भविष्य को सुरक्षित करने का प्रयास किया। किसान हो या छात्र हो या व्यापारी हो या गृहणी हो या पेंशनर्स हो, सभी को एक साथ एक छत के नीचे सेवा दे कर अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों का भी निर्वहन किया।

वैसे बैंकों का काम बड़ा जोखिम भरा है और कर्मचारी अपने घर से दूर होकर भी ईमानदारी से सरकार की सभी योजनाओं को लागू भी कर रहे हैं भले ही उन्हें कितनी भी चुनौती और बाहरी दबाव का सामना करना पड़े। आज बैंक कर्मचारियों की संख्या शाखाओं की ज़रूरत के अनुपात में बहुत कम है ऊपर से उन्हें इस जोखिम भरे काम के मुताबिक सही वेतन एवं सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। एक तरफ सरकार बैंको का विलय और निजीकरण करके सरकारी बैंकों को आम जनता की पहुंच से दूर करने का प्रयास कर रही और निजी कार्पोरेट घरानों को लाभ पहुंचाने का हर संभव प्रयास कर रही। दूसरी तरफ, बैंक लोन डिफाल्टर के नाम सार्वजनिक नहीं करके उन्हें बचाने का प्रयास कर रही है। सरकारी बैंकों की वित्तीय हालत और कर्मचारियों की स्थिति अगर आज खराब है तो, सरकार की इन्हीं गलत नीतियों के वजह से है। हक़ीक़त यह है कि बैंकों का राष्ट्रीयकरण नहीं होकर सरकारीकरण ज्यादा हुआ।

यह अंत्यंत दुर्भाग्य का विषय है कि सरकारी बैंकों और कर्मचारियों की अच्छे कामों की चर्चा और प्रशंसा से ज्यादा, सेवा में यदि एकाध बार कुछ कमी रह जाए तो वो ख़बर सुर्खियों में आ जाती है। देश के सभी लोगों को समझना चाहिए कि जितनी अपेक्षा आप सरकारी बैंक कर्मियों से करते हैं, उतना ही उनकी तकलीफों को भी समझना चाहिए और उनकी हर लड़ाई और आंदोलन में साथ देना चाहिए। देश का विकास तभी संभव है जब बैंकों का और उनके माध्यम से सभी वर्गों का विकास हो।

आईए हम सभी मित्र, बैंक राष्ट्रीयकरण की स्वर्ण जयंती के अवसर पर शपथ लें कि बैंकों के राष्ट्रीयकृत स्वरूप की रक्षा करेंगे और आम जनमानस से अपील करेंगे और उनको भी प्रेरित करेंगे कि वे भी राष्ट्रीयकृत बैंकों को राष्ट्रीय गौरव और राष्ट्रीय अस्मिता का मान देंगे।

जय हिन्द

अब्दुल हमीद इदरीसी
फेथफुल गंज छावनी कानपुर-208004

Please follow and like us:
0

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*