क्यों नही होते आसानी से काम ? जायज है महामहिम की चिंता

भोपाल। समाचार पत्र की एक खबर ने मुझे विचारने पर विवश कर दिया..खबर प्रदेश की यशस्वी राज्यपाल महोदया की और से है जिसमे उनने कहा है कि *कहने के बाद ही गड़बड़ियो को क्यो दुरूस्त करते है कुलपति*.. ?
..मेरा उद्देश्य किसी संस्था विशेष से नही है..लेकिन चाहे अनुकंपा नियुक्ति हो या एन ओ सी ..मकान का नक्शा हो या डुप्लीकेट अंक सूची..अस्पताल मे प्राइवेट वार्ड हो या मकान का नामांकन जीपीएफ निकासी हो या सातवे वेतनमान का एरियर ये सब छोटे छोटे काम है..और इनमे से लगभग सभी कार्य रूटीन से होना चाहिये..और हम सब इन कामो से दो चार होते है..लेकिन अफसोस ये काम आसानी से नही होते है… इन सब कामो के लिये हमे कही न कही..किसी न किसी से जुगाड़ निकाल कर फोन करना/करवाना पड़ता है तब काम या तो हो जाता है या नस्ती चल पड़ती है..हम अगर दिल पर हाथ रख विचारेंगे तो आप सब को मेरी बात सत्य प्रतीत होगी..जिन जिन तक मेरी यह पोस्ट पहुँचे उन सबसे मेरा अनुरोध है..कृपया अपने स्तर के काम का यथोचित और यथाशीघ्र निबटान करे..आपके पास आने बाले समाज के सबसे कमजोर व्यक्ति की मदद करे इससे आपको दुआ और प्रशंसा मिलेगी और मिलेगा सेटीस्फेक्शन जो हमारे ह्रदय के लिये टाँनिक का काम करेगा।
– महेश शर्मा, भोपाल
9407281746

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