भोपाल से नम्रता सरन की अभिव्यक्ति – श्रद्धांजलि

*कवि प्रदीप चौबे जी को श्रृद्धांजलि स्वरूप*

ऊपरवाले को जब
हँसने की मन मे आई …
उसने हास्य कवि प्रदीप की
स्वर्ग से गुहार लगाई….
आँखों में आँसू दे गए जग को
अब हँसा रहे वो रब को….
रेलम पेल , बाप रे बाप
हल्के फुल्के , ख़ुदा गायब है…
जैसी रचनाऐं भारी भरकम
गज़ब ठहाकों का परचम….
पाया हास्य कवि का सम्मान
उस पर काका हाथरसी का मान…
कितना दर्द मन के भीतर
पर वो हँसाते रहे मनभर….
बहुत ही सुंदर रचनाऐं देकर
हँसते हँसाते चले गए….
हँसी ठिठोली के वो सम्राट
सबको रुलाकर चले गए….
युग युग चमकोगे बनके सितारा
शत शत बार नमन हमारा….

*नम्रता सरन “सोना”*
भोपाल

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