धमतरी से डॉ. शैल चन्द्रा की लघुकथा – भविष्य के लिए

लघुकथा-
भविष्य के लिए

कैंसर ग्रस्त सास की सेवा में रत पत्नी को देखकर प्रशान्त बाबू गदगद थे। उनकी पत्नी पूरे मनोयोग से उनकी माँ की सेवा कर रही थी।
प्रशान्त बाबू की पत्नी रोज सुबह उठकर अपनी सास के दैनिक कार्यों को निबटाती फिर उनके लिए भोजन बनाती। उन्हें बड़े प्रेम से खिलाती।
एक दिन प्रशान्त बाबू ने पत्नी से पूछा,”सुनो प्रतिमा, तुम मांजी की इतनी सेवा करती हो। तुम्हें उनका मल -मूत्र साफ करते घृणा नहीं होती ?”
पत्नी ने मुस्कुराते हुए कहा, -” होती तो है पर करना पड़ता है। मेँ नहीं करुँगी तो फिर कौन करेगा? अगर मैं अपनी सास की उपेक्षा करूँगी तो कल मेरी सेवा भी कोई नहीं करेगा। यह तो मैं अपने भविष्य के लिए कर रही हूँ क्योंकि हमारा बेटा यह सब देख रहा है क्यों कि आज हम जो देंगे वही कल पाएंगे।”
प्रशान्त बाबू पत्नी का यह उत्तर सुनकर अपने भविष्य के प्रति आश्वस्त हो गए।
डॉ. शैल चन्द्रा
रावण भाठा, नगरी
जिला- धमतरी
छत्तीसगढ़

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