हिसार से ऋतु गुलाटी का संस्मरण – मदद

संस्मरण – मदद

ये घटना आज से 15-16 साल पुरानी है,पर फिर भी ये मेरे दिल के बहुत करीब है मेरे कैरियर को दिशा देती एक मधुर अविस्मरणीय याद।।
मेरा मायका व ससुराल सहारनपुर (उत्तर प्रदेश)मे पढता है और पति की नौकरी के चलते मै हरियाणा मे हिसार मे रहती हूं।पढने की लगन के चलते मैनै बच्चो के थोडे समझदार हो जाने पर अपनी योग्यता बढाने के लिये एम०ए मेरठ यूनिवर्सिटी से करने की सोची।
फार्म भरना था पर मै किसी कारण लेट हो गयी।अन्तिम तिथि आ पहुंची थी और मै हडबडी मे सहारनपुर जाने के लिये सुबह -सुबह घर से निकल ली।सफर सही चल रहा था।बस अब एक घंटे मे सहारनपुर पहुंच जाऊगी और अपना फार्म जमा करवा दूंगी।
पर ये क्या ज्यो हि मेरी बस यमुनानगर पहुंची,पता चला पुल टूट गया है और ढीक होने मे चार घंटे लगेगे। बस का आवागमन ठप्प हो गया।तीन किलोमीटर लम्बा जाम लग गया दोनो ओर से।
इसी बीच दोपहिया वाहन को जाने दे रहे थे।
मै अकेली थी और घबरा गयी,उधर मेरे ससुराल
मे मेरा इन्तजार हो रहा था!क्योकि फार्म जमा कराने जाना था।उस समय मोबाईल फोन भी नही होते थे।
क्या कंरू,?कैसे सूचित करू कि मै जाम मे फंस गयी हूं?सहारनपुर की टिकट मेरे हाथ मे थी,मैनै तुरन्त निर्णय लिया,टिकट को फाडकर फैका व अपना बैग लेकर बस से नीचे उतर आयी।पैदल चलते हुए जाम को पार कर मुख्य सड़क पर आ गयी!अब मेरे सामने एक ही विकल्प था कि मै सहारनपुर जाने के लिये किसी दोपहिये चालक से लिफ्ट मांगू?मन ही मन ईश्वर को याद किया,तभी चमत्कार हुआ,एक स्कूटर चालक ने मुझसे आकर पूछा,”-कहाँ जाना है मैम आपको?
मैनै डरते-डरते बताया #सहरनपुर#
उसने कहा-“बैठो”मै छोड देता हूं!
मै चुपचाप बैठ गयी व ईश्वर को धन्यवाद किया।
सारे रास्ते वो भला मानस चुपचाप अपना स्कूटर चलाता रहा!रास्ते मे वो दो मिनट किसी गत्ता मिल पर रूका व बातचीत कर लौट आया !हेलमेट पहने था अतः मै चेहरा भी नही देख पायी।उसे मैनै बता दिया था कि आप मुझे घंटाघर छोड दे,आगे मै रिक्शा करके चली जाऊगी!और उस सज्जन पुरूष ने वैसा ही किया मै मन ही मन सोच रही थी कि अभी उतरते ही धन्यवाद कहूंगी पर वो मुझे उतार कर तुरन्त आगे बढ गया। मै समय पर घर पहुंच गयी और मैनै अपना फार्म भी जमा करा दिया ।
आज भी मैने इसे एक मधुर याद के रूप मे संजोया हुआ है!अगर उस दिन उस अंजान व्यक्ति ने मेरी मदद नही की होती,तो ना जाने कितने घंटे मुझे उस जाम को झेलना पडता’व सुनसान जगह पर वक्त बिताना पडता।

-ऋतु गुलाटी , हिसार
स्वरचित मौलिक संस्मरण।

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