जयपुर से कुन्ना चौधरी की कविता – कलाकार

कलाकार

वो निराकार या साकार ,
जो भी हो ,है तो कलाकार ….

सुर लय ताल मे कहे ,
तो बन जाता गीतकार …

शब्दों और भावों मे दिखता ,
तो समझा जाता अदाकार ….

रंगो में उकेरे भाव जिसने ,
कहलाया वो चित्रकार ….

पत्थर को तराशा जिसने ,
तो बन जाता फ़नकार ….

वो जिसने शब्दों में भाव लिखे ,
हो जाता कवि या रचनाकार ….

सबके अपने अपने धर्म कर्म ,
नहीं कोई जीव यहाँ बेकार ….

बया का घोंसला हो या सीप में मोती ,
हर जीव में नज़र आता वो निराकार ….

क्यों मैं और मेरे में भटक रहा बन्दे ,
कर ले सबको जैसा है स्वीकार …

वो निराकार या साकार ,
जो भी हो ,है तो कलाकार ….

– कुन्ना चौधरी, जयपुर

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