भिण्ड,मध्यप्रदेश से अजय भदौरिया का गीत – साँसों में गीत घुल गया

गीत

मिला पुरवा से राहों में बादल,
धुंधला बादल तो धुल गया ।
उसकी आँखों में नगमे भरे,
कोई साँसों में गीत घुल गया ।
1-
मिले राहों ..में उससे, जाना-
कितना सुन्दर है ये जमाना
कोई अहसास तितलियों सा
दर्द भी गुनगुनाए तराना

सुरमई शाम सा वो सुरीला
संगीत हवा में पिघल गया।
2-
हम वहां गर न राहों में मिलते
प्यार वाले यहां गुल न खिलते
नूतन स्वप्न देने को जग को-
जाने। कब सफर को निकलते

प्रात की सुनहली किरण सा-
जर्रे – जर्रे में बिखर गया ।

अजय कुमार सिंह भदौरिया
जिला भिण्ड, मध्य प्रदेश,
स्वरचित,सर्वाधिकार सुरक्षित हैं

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